Saturday, 19 November 2016

युवा सहेज रहे हैं हमारी भूली-बिसरी हुई सांस्कृतिक विरासत

हमारी संस्कृति के तानेबाने में कई ऐसे विश्वास हैं जो जनआस्था का केंद्र तो है ही साथ ही ये हमारी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा भी हैं। आज के युग की जीवन शैली ने हमारी संस्कृति को बहुत नुकसान पहुंचाया है। इससे जुड़ी कई परंपराएं आज या तो समाप्त हो चुकी हैं या समाप्त होने के कगार पर है या कि अपने अस्तित्व के लिये संघर्ष कर रही हैं। ऐसी है एक कहानी है जो मैं आपने सामने प्रस्तुत कर रहा हूं मध्यप्रदेश के अंतर्गत आने वाले धार नगरी के ग्राम निसरपुर की है ये कहानी। आईये जानते हैं इस कहानी के बारे में- निसरपुर के पाटीदार समाज द्वारा तेजाजी की कथा का भव्य कार्यक्रम रखा गया समाज के लोगों ने एक से डेढ़ माह तक कथा की रोज रात में रियलसर की गई ।गाँव के 75 वर्षीय हीरा बाबा बायडि वाले ने बताया की आज से 25 वर्ष पहले ये नाटक प्रचलन में था मगर समय के साथ तरह तरह के मनोरंजन होने के कारण इस कथा को पूर्ण रूप से बंद कर दिया गया था। समाज के लोगों और आज की युवा पीढ़ी के बार-बार कहने पर इस कथा को पुन: सुचारू रूप से संचालित किया जायेगा। समाज के घनश्याम पाटीदार के अनुसार नाटक के करीबन दस हजार रुपये एकत्रित किए और किरदारों के अनुरूप इनकी पोशाक तैयारी करवाई गई एक से डेढ़ माह तक निरंतर मेहनत करने के बाद बुधवार गुरुवार के दरमियान इस नाटक का दो दिन तक आयोजन हुआ पाटीदार समाज के युवाओं द्वारा सत्य वीर तेजाजी की जीवन लीला पर आधारित वीर तेजाजी की सत्य कथा को नाटकीय रूप देकर जीवन्त स्वरूप में दिखाने हेतु रंग मंच पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। दो दिवसीय इस कथा को 16 नवंबर वार बुधवार से शुरू कर सफलतम प्रयास पाटीदार समाज के युवावों कलाकारों ने वीर तेजाजी की छाया चित्र की पूजा की गई । इस नाटकीय कथा में निम्न पात्रों की भूमिका वीर तेजाजी धुरजी मुकाती,पत्नी सुन्दर मनोज सिपाई, पिता बक्शाजी सुरेश पाटीदार,माता सीताराम बट्टया, साथी गजेंद्र देउलवाला,मंत्री शांतिलाल पाटीदार,जोशी शांतिलाल खयरिया ,पेमलबाई प्रवीण इंद्राडिय़ा,लाचा वेणीराम पाँच भाया,मेण्या डाकू महेंद्र गोपाल ,रेवाराम भोलू ,रामेश्वर खलेवाला, मामा कैलाश सिपाई,काका जगदीश पाचभाया ,माली सचिन पाचभाया, विराजी दिनेश उद्धव,के किरदार के रूप में भूमिका का प्रदर्शन किया गया। ये मजे की बात है कि इस नाटक में महिलाओं के पात्र भी पुरुषों ने ही निभाये, जिसमें इन महिला पात्र निभाने वाले पुरुषों भी आकर्षक अभिनय किया। यह नाटकीय कथा आज से 24 वर्ष पूर्व निसरपुर पाटीदार चौक में की गई थी जो एक यादगार बन कर दर्शकों के दिल में बस कर रह गई थी । आज नये समाज के युवा पीढ़ी में कथा की विशेषता बतलाने के लिए पुनर्जीवित कर एक धर्म सन्देश देने हेतु वीर तेजाजी की सत्य जीवन कथा को नगर की जनता व समाज के सम्मुख प्रस्तुत किया। कथा में पाटीदार समाज ने समस्त समाज को आमंत्रित किया गया। आज जिस पौराणिक प्रथा को युवा वर्ग ने देखा नही उनको एक सत्य कथा से अवगत करवाने और पौराणिक कथा को नाटकीय रूप में जनता को सन्देश देने के सफलतम प्रयास रहा। वीर तेजाजी नाटक देखने उमड़ा जनसैलाब- नाट्य का अंतिम रूपांतरण तेजाजी का किरदार करने वाले धुरजी मुकाती इतने भावुक हो गए की अपनी आँखों में आंसुओं की जैसे धारा निकल रही वही देखने के लिए आए जनता उस भावुक वातावरण में आँखों से आंसू झलक गए इसके साथ ही निसरपुर सहित भंवरिया सुसारी, देशवाल्या, कोंनंदा, पिपलिया, निंबोल कड़माल, से हजारों की संख्या में लोगों का जमावड़ा रहा 2 दिवसीय नाटक को देखने के लिए ग्रामीणों ने ठंड में भी रात 1.00 बजे तक जगह नहीं छोड़ी नाटक को लेकर निसरपुर के लोगों सहित आसपास के ग्रामीणों ने भी धार्मिक कथा का लाभ लिया ।

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